‘हम 4% हिंदुओं को बर्दाश्त कर रहे…’, बोले PAK के राष्ट्रपति, भारत के खिलाफ उगला जहर
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर ‘बर्दाश्त’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सवाल उठे. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान हिंदुओं को आजादी देता है, जबकि रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव, जबरन धर्म परिवर्तन और हिंसा जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया गया.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिंदू अल्पसंख्यकों को लेकर ऐसा बयान दिया, जिस पर सवाल उठने लगे हैं…. जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान और वहां के मुसलमान 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को ‘बर्दाश्त’ करते हैं. उन्होंने भारत के ‘अखंड भारत’ के विचार का भी जिक्र किया औ…
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 14 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत के खिलाफ बयानबाजी करते हुए कहा कि पाकिस्तान में मुस्लिम मानसिकता दूसरों को बर्दाश्त (tolerate) करने की है और वे वहां 4% हिंदू आबादी को बर्दाश्त कर रहे हैं. जरदारी ने भारत के ‘अखंड भारत’ के विचार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पाकिस्तान के हिंदू भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में ही रहना पसंद करेंगे. [1, 2, 3]
इस पूरे घटनाक्रम और विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रपति जरदारी का विवादित बयान
- अखंड भारत पर टिप्पणी: राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि भारतीय लोग ‘अखंड भारत’ में विश्वास रखते हैं, लेकिन पाकिस्तान की मानसिकता अल्पसंख्यकों को स्वीकार करने की है. [1]
- ‘बर्दाश्त’ शब्द पर विवाद: जरदारी ने पाकिस्तान के हिंदुओं को एक ऐसा समुदाय बताया जिसे वहां “बर्दाश्त” किया जाता है. उनके इस बयान की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा आलोचना की जा रही है क्योंकि ‘बर्दाश्त’ करना समानता का अधिकार देने से बेहद अलग है. [1, 2]
- स्वतंत्रता दिवस का मौका: यह बयान इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ स्मारक के उद्घाटन के दौरान दिया गया, जहाँ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे. [1]
भारत के खिलाफ जहर उगलने की वजह
- सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty): पाकिस्तान इस समय गहरे जल संकट से जूझ रहा है क्योंकि भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस समझौते को निलंबित कर दिया था. स्वतंत्रता दिवस के भाषण में शहबाज शरीफ ने भारत द्वारा पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया और पानी की एक-एक बूंद को पाकिस्तान की ‘रेड लाइन’ बताया. [1, 2]
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का डर: मई 2025 में भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसके बाद से पाकिस्तानी हुक्मरान लगातार भारत के खिलाफ युद्ध की गीदड़भभकी दे रहे हैं. [1, 2]
पाकिस्तानी दावे की जमीनी हकीकत
- अल्पसंख्यकों की बदहाली: राष्ट्रपति जरदारी जहां पाकिस्तान में हिंदुओं के सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं, वहीं Human Rights Watch (HRW) की रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों (Blasphemy Laws) का दुरुपयोग करके धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है. [1]
- लगातार उत्पीड़न: पाकिस्तान में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक लगातार जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण और भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा (Mob Violence) का सामना कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी नाकामियों और बदहाल आर्थिक स्थिति को छुपाने के लिए पाकिस्तानी नेता अक्सर ऐसे जहरीले नैरेटिव का सहारा लेते हैं.
किस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और वैश्विक मंचों पर एक नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तानी मानसिकता सहिष्णु है, लेकिन “बर्दाश्त” (Tolerate) शब्द के इस्तेमाल ने उनके दावों की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक विफलताओं, जैसे चरमराती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता से जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।
इस घटनाक्रम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को आप इन समाचार रिपोर्टों के माध्यम से विस्तार से समझ सकते हैं:
- अल्पसंख्यकों की जनसंख्या का सच: जरदारी के 4% के दावे और पाकिस्तान की वास्तविक जनगणना के आंकड़ों में अंतर को समझने के लिए पढ़ें।
- बयान के पीछे की टाइमिंग: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी के राजनीतिक मायनों को जानने के लिए का संदर्भ लें।
यदि आप पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों या इस पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में जानना चाहते हैं, तो मुझे बताएं।
