NEET पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक का बड़ा आंदोलन, देशभर में बढ़ी चर्चा।
नई दिल्ली: लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों अपनी भूख हड़ताल को लेकर चर्चा में हैं। उनका कहना है कि देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है।
क्यों शुरू की भूख हड़ताल?
सोनम वांगचुक का आरोप है कि NEET-UG 2026 सहित कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका मानना है कि छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली मिलनी चाहिए।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- पेपर लीक के मामलों की निष्पक्ष जांच।
- परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
- दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार कई दिनों से भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका वजन काफी कम हुआ है और डॉक्टरों ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की चेतावनी दी है। कई सामाजिक संगठनों, विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है।
सरकार का क्या रुख है?
सरकार की ओर से इस मामले पर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन अब तक वांगचुक की सभी मांगों को स्वीकार किए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस बीच परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।
छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति के विरोध तक सीमित नहीं है। यदि परीक्षा प्रणाली में सुधार होता है, तो भविष्य में लाखों छात्रों को अधिक निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा प्रक्रिया का लाभ मिल सकता है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

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