PM को मिले उपहारों की हुई ई-नीलामी, कितने रुपये प्राप्त हुए? सामने आ गया आंकड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले उपहारों की साल 2025 में हुई ई-नीलामी से सरकार को कुल 1.89 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह आधिकारिक आंकड़ा पेश किया. यह इस श्रृंखला का सातवां संस्करण था, जिसमें देश-विदेश से मिले बेशकीमती स्मृति चिह्नों की बोली लगाई गई थी.
इस बार नीलामी में क्या था खास? (7वां संस्करण)
साल 2025 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह ई-नीलामी इस कड़ी का सातवां संस्करण थी. इस बार नीलामी के लिए 1,300 से अधिक उपहारों को जनता के सामने पेश किया गया था. इन उपहारों में निम्नलिखित वस्तुएं मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं:
पारंपरिक कलाकृतियां: भारत के अलग-अलग राज्यों (विशेषकर गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) की पारंपरिक पेंटिंग्स, हस्तशिल्प और शॉल.
खिलाड़ियों के उपहार: पैरालंपिक 2024 के विजेताओं और भारतीय एथलीटों द्वारा पीएम मोदी को ऑटोग्राफ देकर भेंट किए गए खेल उपकरण, टी-शर्ट और जूते.
धार्मिक और सांस्कृतिक मूर्तियां: भगवान गणेश, भगवान विष्णु, श्री राम मंदिर के मॉडल और विभिन्न देवी-देवताओं की पीतल व सोने की परत वाली नक्काशीदार मूर्तियां.

नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में लगी थी प्रदर्शनी
आम जनता इन उपहारों को करीब से देख सके, इसके लिए दिल्ली के प्रसिद्ध नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था. इस प्रदर्शनी में कला प्रेमियों और देशवासियों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसके बाद ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोगों ने इन पर बढ़-चढ़कर बोलियां लगाईं.
पिछले सालों की नीलामियों का ट्रैक रिकॉर्ड
पीएम मोदी को मिलने वाले स्मृति चिह्नों की नीलामी की शुरुआत साल 2019 में की गई थी. यदि पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अभियान को जनता का लगातार भरपूर समर्थन मिला है:
- साल 2024 (छठा संस्करण): इस दौरान 600 से अधिक वस्तुओं की नीलामी की गई थी, जिससे सरकार ने 2.24 करोड़ रुपये जुटाए थे.
- शुरुआती 5 चरण: संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती पांच चरणों में आयोजित की गई नीलामियों से कुल मिलाकर 50 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि एकत्र हुई थी.
‘नमामि गंगे’ प्रोजेक्ट में दान होती है पूरी राशि
इस ई-नीलामी का सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण पहलू इसका उद्देश्य है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके उपहारों की नीलामी से मिलने वाला एक-एक पैसा व्यक्तिगत उपयोग में नहीं जाता. इस पूरी धनराशि को गंगा नदी के संरक्षण और उसकी सफाई के लिए चलाए जा रहे केंद्र सरकार के फ्लैगशिप प्रोग्राम ‘नमामि गंगे’ (Namami Gange) फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है.
सरकार के इस कदम की सराहना न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होती है, क्योंकि यह देश की राष्ट्रीय नदी को स्वच्छ बनाने के जन-आंदोलन में आम नागरिकों को सीधे योगदान देने का एक अनोखा अवसर प्रदान करता है.
