Gen-अल्फा को घसीटा-मारी लात… महोबा प्रोटेस्ट में पुलिस ने की बदसलूकी, VIDEO
महोबा जिले के रैपुरा कलां गांव के स्कूली बच्चों ने खराब सड़क और जलभराव के कारण झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर तीन घंटे तक जाम लगाया. बच्चों का आरोप है कि मिल संचालकों की दबंगई और अधिकारियों की अनदेखी के कारण उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं.

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां मंगलवार को झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर बड़ा हंगामा हुआ. सामने आया है कि महोबा केके रैपुरा कलां गांव के स्कूली बच्चे ‘जेन अल्फा’ खराब रास्ते और जलभराव से परेशान होकर प्रदर्शन किया. उन्होंने हाईवे पर जाम लगा दिया था. बरसते पानी के … बीच करीब तीन घंटे तक लगे इस जाम से दोनों तरफ गाड़ियों की कतारें लग गईं.
आरोप- जाम खुलवाने के लिए बच्चों को पुलिस ने घसीटा
बच्चों का आरोप है कि मिल संचालकों की दबंगई और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से परेशान होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा. वहीं मौके पर पहुंची पुलिस पर बच्चों के साथ बदसलूकी करने का आरोप लगा है. कहा जा रहा है कि पुलिस ने जेन-अल्फा प्रदर्शनकारी बच्चों को घसीटकर जाम खुलवाया. इस गंभीर आरोप के बाद प्रदेश की सियासत में भी माहौल गर्म होने की आशंका है.
घटना का मुख्य कारण: दलदल बनी सड़क और प्रशासनिक उदासीनता
यह पूरा विवाद महोबा सदर तहसील क्षेत्र के रैपुरा कलां गांव का है। ग्रामीणों और छात्रों के अनुसार, गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले काफी समय से पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और गड्ढों में तब्दील हो गई है। []
मानसून की बारिश के बाद इस मार्ग पर भीषण जलभराव हो गया है, जिससे छात्रों का स्कूल जाना दूभर हो गया था। स्थिति इस कदर खराब है कि इस रास्ते से गुजरने वाले ई-रिक्शा और ऑटो आए दिन पलट जाते हैं, जिसके कारण कई मासूम बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं। इस सड़क का असर सिर्फ रैपुरा कलां ही नहीं, बल्कि पड़ोसी गांवों जैसे बनियातला, महानपुरा और मझलवारा के हजारों लोगों पर भी पड़ रहा है। []
ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में संचालित दाल मिलों के ओवरलोडेड ट्रकों के भारी आवागमन की वजह से यह सड़क बुरी तरह ध्वस्त हुई है। इसके अलावा, इन मिलों से निकलने वाला दूषित पानी भी इसी मुख्य रास्ते पर छोड़ दिया जाता है, जिससे वहां हमेशा दलदल और बदबूदार जलभराव बना रहता है। कई बार स्थानीय प्रशासन और मिल संचालकों से शिकायत करने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो स्कूली बच्चों ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया। []
हाईवे पर 3 घंटे का चक्काजाम और पुलिसिया कार्रवाई
अपनी पढ़ाई प्रभावित होने और रोजाना के हादसों से तंग आकर 19 अगस्त की सुबह भारी संख्या में स्कूली छात्र और छात्राएं झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर इकट्ठा हो गए। बच्चों ने सड़क पर पत्थर और पेड़ की लकड़ियां रखकर चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। [1, 3]
जाम की सूचना मिलते ही शहर कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। प्रदर्शनकारी छात्राओं ने सड़क पर मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर अधिकारियों के सामने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखनी चाही। []
परंतु, छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ अपराधियों जैसा बर्ताव शुरू कर दिया। बच्चों को जबरन हटाने के लिए खाकी वर्दीधारियों ने बल प्रयोग किया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने नाबालिग बच्चों को बेरहमी से घसीटा, उन्हें लातें मारीं और उनके माता-पिता के खिलाफ कानूनी केस दर्ज करने व लाठीचार्ज करने की खुली धमकियां दीं। [1, 3]
वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद और आक्रोश
जैसे ही पुलिस की इस बदसलूकी का वीडियो इंटरनेट और न्यूज चैनलों पर प्रसारित हुआ, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी मासूम छात्रों को जबरन रास्ते से हटा रहे हैं, जिससे पुलिस की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। लोगों का कहना है कि जो बच्चे अपने मौलिक अधिकार और बेहतर भविष्य के लिए शांतिपूर्ण ढंग से बुनियादी ढांचे की मांग कर रहे थे, उन्हें डराने और उन पर लात-घूंसे चलाने का कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। [1, 3]
प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
हाईवे पर करीब तीन घंटे तक चले इस भारी ड्रामे और हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे तहसीलदार अभिषेक मिश्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने बच्चों की जायज शिकायतों को सुना और मामले को तुरंत संबंधित लोक निर्माण विभाग तक पहुंचाकर सड़क की मरम्मत व जल्द से जल्द नए सिरे से पक्का निर्माण कराने का लिखित और मौखिक आश्वासन दिया। इसके साथ ही दाल मिलों के दूषित पानी की निकासी को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाने का भरोसा दिलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों से पुख्ता आश्वासन मिलने के बाद ही बच्चों ने हाईवे से जाम हटाया, जिसके बाद पुलिस ने यातायात सुचारू रूप से बहाल कराया। [,
यदि आप इस घटना से जुड़े कानूनी ऐक्शन, पुलिस प्रशासन की आधिकारिक सफाई या सड़क निर्माण के लेटेस्ट अपडेट के बारे में जानना चाहते हैं, तो मुझे बताएं।
