“‘No Relations’: Chirag Paswan Moves Police Against Influencer Swatantra Bhardwaj for Misusing His Name”
नाम का दुरुपयोग और सियासी भूचाल: जब चिराग पासवान ने स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ उठाई आवाज
नई दिल्ली:
देश की राजनीति में नेताओं के नाम और उनके रसूख का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिशों के कई मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन जब खुद एक केंद्रीय मंत्री किसी आरोपी के खिलाफ मोर्चा खोल दे, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला राजधानी दिल्ली में सामने आया है, जहां केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। चिराग पासवान ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका स्वतंत्र भारद्वाज से कोई निजी या व्यावसायिक संबंध नहीं है और उनके नाम तथा तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया गया है। [1, 2, 3, 4, 5]
क्या है पूरा विवाद और वायरल वीडियो का सच?
इस पूरे विवाद की जड़ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो पॉडकास्ट है। इस इंटरव्यू में भारद्वाज ने बेहद चौंकाने वाला और विवादित कबूलनामा किया। उसने दावा किया कि जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान उसने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हमला किया था और उनका ‘सिर फोड़’ दिया था। [1, 2, 3]
बात सिर्फ मारपीट के कबूलनामे तक ही सीमित नहीं रही; स्वतंत्र भारद्वाज ने वीडियो में खुलेआम यह दावा भी किया कि उसके पास दिल्ली पुलिस का डंडा था और अपने ऊंचे राजनीतिक संपर्कों के कारण वह गिरफ्तारी से बच गया। इसी दौरान उसने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और भाजपा नेता कपिल मिश्रा को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए उनके संरक्षण का दावा किया था। [1, 2]
चिराग पासवान का कड़ा रुख और पुलिस शिकायत
वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार तथा दिल्ली पुलिस को घेरना शुरू कर दिया。मामले की गंभीरता को देखते हुए चिराग पासवान ने तुरंत कदम उठाया और आरोपी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। [1, 2]
मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है। एक व्यक्ति खुलेआम पॉडकास्ट पर कबूल कर रहा है कि उसने किसी को इतना मारा कि उसकी जान जा सकती थी, और फिर वह राजनीतिक रसूख का हवाला दे रहा है। समाज में ऐसा उदाहरण जाना बेहद खतरनाक है। चूंकि उस व्यक्ति ने मेरे और अन्य राजनेताओं के नाम का दुरुपयोग किया है, इसलिए मैंने उसके खिलाफ दिल्ली पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।” [1, 2, 3]
पासवान ने सार्वजनिक जीवन की हकीकत को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक राजनेता होने के नाते रोज़ाना सैकड़ों लोग उनसे मिलते हैं, फोटो खिंचवाते हैं या अपनी बात रखते हैं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उस व्यक्ति से कोई निजी रिश्ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी को भी उनके नाम पर कानून को प्रभावित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। [1, 2, 3]
निशु आजाद के परिवार को न्याय का भरोसा
चिराग पासवान ने इस पूरे विवाद में पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पार्टी पूरी तरह से पीड़ित छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद और उनके पिता के साथ खड़े हैं। पासवान ने दिल्ली पुलिस से मांग की है कि इस मामले में किसी भी दबाव के बिना पूरी तरह निष्पक्ष जांच की जाए और तथ्यों के आधार पर दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि समाज में एक सही संदेश जा सके। [1, 2, 3, 4]
राजनीतिक गरमाहट और आरोपी की गिरफ्तारी
स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, भीम आर्मी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर भारी प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोपी पर एससी-एसटी एक्ट और हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धाराएं लगाने की मांग की थी। [1, 2, 3]
चौतरफा दबाव और चिराग पासवान की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में ले लिया है। [1, 2]
निष्कर्ष
चिराग पासवान द्वारा अपने ही नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना भारतीय राजनीति में एक साहसिक और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे यह साफ संदेश जाता है कि राजनीतिक रसूख का हवाला देकर कोई भी अपराधी कानून की गिरफ्त से नहीं बच सकता। अब सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस की आगे की जांच और अदालती कार्रवाई पर टिकी हैं。 [1]
