‘मेलोनी समझ के तो नहीं पकड़ा था?’, राहुल-संदीप दीक्षित ने विदेश नीति पर कसा तंज
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मावलंकर हॉल में रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन के दौरान केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा तंज कसा. उन्होंने कहा कि सरकार की…

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘रचनात्मक कांग्रेस’ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तंज कसा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेशी नेताओं को गले लगाने की शैली (“हग डिप्लोमेसी”) का मजाक उड़ाते हुए मंच पर मौजूद पार्टी नेता संदीप दीक्षित को गले लगा लिया। इस पर संदीप दीक्षित ने हंसते हुए टिप्पणी की, “कहीं आप मुझे मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगा रहे थे?” जिस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया, “मैं अभी उस स्टेज तक नहीं पहुंचा हूं।”
इस पूरे घटनाक्रम और दोनों नेताओं के बयानों की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
मुख्य घटनाक्रम और बयान
- विदेश नीति पर कटाक्ष: राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी के दिमाग में यह अजीब बात आ गई है कि विदेशी नेताओं को गले लगाना ही देश की विदेश नीति है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नजर में विदेश नीति का मतलब सिर्फ गले मिलना रह गया है।
इटली की पीएम का संदर्भ: संदीप दीक्षित का इशारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पीएम मोदी की मुलाकातों के दौरान की तस्वीरों और सोशल मीडिया पर चलने वाले मीम्स की तरफ था।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर घेरा: राहुल गांधी ने इस दौरान ईरान-इजरायल विवाद और अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि ईरान संकट में भारत मध्यस्थता कर सकता था, लेकिन सरकार की निष्क्रियता के कारण पाकिस्तान ने यह भूमिका ले ली।
भाजपा (BJP) का पलटवार
कांग्रेस नेताओं की इस नोकझोंक और टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है:
- बीजेपी प्रवक्ता ने राहुल गांधी और संदीप दीक्षित के इस व्यवहार को “अशोभनीय और अपमानजनक” करार दिया।
- सत्तापक्ष के नेताओं का कहना है कि एक महिला राष्ट्राध्यक्ष (जॉर्जिया मेलोनी) का नाम लेकर इस तरह का मजाक उड़ाना कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। [1]
- उन्होंने इसे देश के प्रधानमंत्री और भारत के विदेशी संबंधों का सार्वजनिक मंच पर बड़ा अपमान बताया है।
‘मेलोनी समझ कर तो नहीं पकड़ा था?’: राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने पीएम मोदी की ‘गले मिलने की कूटनीति’ पर कसा तंज, राजनीतिक घमासान तेज
नई दिल्ली:
देश की राजधानी में आयोजित ‘रचनात्मक कांग्रेस’ सम्मेलन के मंच से एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और उनकी प्रसिद्ध ‘हग डिप्लोमेसी’ (विदेशी नेताओं को गले लगाने की शैली) पर तीखा और अनूठा तंज कसा है।
इस दौरान मंच पर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के संदर्भ ने सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक हलचल मचा दी है। जहाँ कांग्रेस इसे सरकार की खोखली कूटनीति पर प्रहार बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे बेहद “अशोभनीय और महिला विरोधी” कृत्य करार दिया है।
कैसे शुरू हुआ मंच पर यह पूरा घटनाक्रम?
‘रचनात्मक कांग्रेस’ के बैनर तले आयोजित इस सम्मेलन में राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर बात करना शुरू किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कूटनीति को बेहद व्यक्तिगत और दिखावे का जरिया बना दिया है।
अपनी बात को मजाकिया और व्यावहारिक अंदाज में समझाने के लिए राहुल गांधी ने मंच पर ही खड़े कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को आगे बढ़कर गले लगा लिया। राहुल गांधी द्वारा अचानक गले लगाए जाने पर संदीप दीक्षित ने मुस्कुराते हुए माइक पर तंज कसा: “कहीं आप मुझे मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगा रहे थे?”
संदीप दीक्षित की इस त्वरित टिप्पणी पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। इस पर राहुल गांधी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और उन्होंने तुरंत जवाब देते हुए कहा: “नहीं, मैं अभी उस स्टेज तक नहीं पहुंचा हूं।”
राहुल गांधी के सरकार पर गंभीर कूटनीतिक आरोप
हंसी-मजाक के इस पल के तुरंत बाद राहुल गांधी ने दोबारा गंभीर रुख अपनाया और मोदी सरकार की विदेश नीति की कमियों को रेखांकित किया। उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदु उठाए:
- दिखावे की विदेश नीति (Event-Driven Diplomacy): राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के साथ केवल तस्वीरें खिंचवाना और उन्हें गले लगाना ही कूटनीति है। उन्होंने कहा कि मजबूत विदेश नीति केवल व्यक्तिगत संबंधों से नहीं, बल्कि देश के रणनीतिक हितों से तय होती है।
- चीन के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी: नेता प्रतिपक्ष ने लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि चीन हमारी सीमाओं के भीतर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। सरकार इस वास्तविक खतरे से ध्यान भटकाने के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय दौरों का प्रोपेगैंडा फैलाती है।
- वैश्विक मध्यस्थता में भारत की कमजोर स्थिति: राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में भारत ऐसे संकटों में एक निष्पक्ष और मजबूत मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाता था। लेकिन आज हमारी निष्क्रियता के कारण पाकिस्तान जैसे देश इस क्षेत्र में राजनयिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
जॉर्जिया मेलोनी का संदर्भ और सोशल मीडिया मीम्स
संदीप दीक्षित का यह तंज दरअसल पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे G7 शिखर सम्मेलन) के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकातों के बाद सोशल मीडिया पर बने मीम्स और रील्स की पृष्ठभूमि पर आधारित था। इंटरनेट पर दोनों नेताओं की तस्वीरों और ‘Melodi’ (मेलोडी) हैशटैग को लेकर काफी चर्चाएं होती रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसी इंटरनेट ट्रेंड का सहारा लेकर सीधे प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।
भाजपा का तीखा पलटवार: “यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और महिलाओं का अपमान है”
कांग्रेस नेताओं के इस वीडियो के वायरल होते ही भाजपा ने चौतरफा हमला बोल दिया है। भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों और प्रवक्ताओं ने संयुक्त रूप से कांग्रेस की इस बयानबाजी की निंदा की है:
- महिला राष्ट्राध्यक्ष की गरिमा को ठेस: भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि एक विदेशी महिला राष्ट्राध्यक्ष (जॉर्जिया मेलोनी) के नाम का इस तरह से राजनीतिक मंच पर मजाक उड़ाना बेहद शर्मनाक है। यह कांग्रेस पार्टी की “ओछी और महिला विरोधी मानसिकता” को उजागर करता है।
- देश की छवि खराब करने का प्रयास: सत्तापक्ष के नेताओं का तर्क है कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति के कारण आज दुनिया भर में भारत का डंका बज रहा है। कांग्रेस अपनी राजनीतिक हताशा में आकर विदेशी संबंधों को घरेलू और निचले स्तर की राजनीति का हिस्सा बना रही है, जिससे देश की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंचता है।
- अशोभनीय व्यवहार: भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और संदीप दीक्षित के इस व्यवहार को ‘अपरिपक्व’ बताया और मांग की कि कांग्रेस नेतृत्व को इस अमर्यादित टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए।
निष्कर्ष
‘रचनात्मक कांग्रेस’ सम्मेलन का यह वाकया यह साफ करता है कि आने वाले समय में विदेश नीति और कूटनीति भी घरेलू राजनीति के मुख्य मुद्दों में शामिल रहने वाली है। जहाँ विपक्ष सरकार को सीमाओं की सुरक्षा और वैश्विक मंच पर ठोस फैसलों के नाम पर घेर रहा है, वहीं सत्तापक्ष विपक्ष के इस आक्रामक और मजाकिया रवैये को देश के अपमान से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
यदि आप इस लेख को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं, तो कृपया मुझे बताएं:
- क्या आप इसमें संदीप दीक्षित की राजनीतिक पृष्ठभूमि (जैसे शीला दीक्षित जी के संदर्भ में) को जोड़ना चाहते हैं?
- क्या आप ईरान-इजरायल और चीन सीमा विवाद पर भारत सरकार के आधिकारिक रुख को इस लेख में
