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राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन- दुनिया में युद्ध के कारण संकट, इसके बावजूद तेजी से बढ़ रही हमारी अर्थव्यवस्था

By Saba
August 14, 2026 8 Min Read
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राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि दुनिया में जंग और अस्थिरता के बावजूद, भारत की इकोनॉमी की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक रहने का अनुमान है। जानें राष्ट्रपति ने क्या-क्या कहा।

स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन किया। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, मैं सभी को बधाई देना चाहती हूं। कुछ ही घंटों में, देश की स्वतंत्रता के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत होगी। मैं तीनों सशस्त्र बलों, सभी सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिस कर्मियों की कर्तव्य-निष्ठा की सराहना करती हूं। मैं उन भारतीयों की भी प्रशंसा करती हूं जो वैश्विक मंच पर देश का मान-सम्मान बढ़ा रहे हैं, साथ ही विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों में काम करने वाले नागरिकों की भी सराहना करती हूं।

दुनिया में संकट के बावजूद तेजी से बढ़ रही भारत की इकोनॉमी

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज के भारत में हर कोई सपने देख सकता है और आगे बढ़ सकता है। दुनिया में युद्ध के कारण संकट है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। दुनियाभर में युद्ध और अस्थिरता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुनी से भी ज्यादा रहने का अनुमान है। दुनिया के आधे से अधिक रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रणाली से जुड़े हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।

सिंधु जल समझौता रद्द होने को राष्ट्र हित में बताया

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को याद करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सटीक हमले करने की भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को प्रदर्शित किया। आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों को, चाहे वे कहीं भी छिपे हों, अंजाम भुगतना ही होगा। वहीं, सिंधु जल समझौते पर राष्ट्रपति बोलीं, ‘आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करना राष्ट्रीय हित में है। खासकर किसानों के लिए यह एक निर्णायक कदम है।’

राष्ट्रपति ने 78 वीरता पुरस्कारों को दी मंजूरी

गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है, जिनमें 13 मरणोपरांत पुरस्कार शामिल हैं।

और 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने की तरफ बढ़ रहा भारत

राष्ट्रपति ने कहा कि मुफ्त राशन कार्यक्रम 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। वहीं, 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य हासिल किया गया, देश अब 3 करोड़ और ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।

वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता की मिसाल: देश के नाम राष्ट्रपति का संबोधन

नई दिल्ली:
स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। उनका यह भाषण वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आज जब पूरी दुनिया युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) के संकट से जूझ रही है, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। यह देश की मजबूत नीतियों, रणनीतिक दूरदर्शिता और 140 करोड़ नागरिकों के कड़े परिश्रम का परिणाम है।

वैश्विक उथल-पुथल और भारतीय अर्थव्यवस्था की दृढ़ता

वर्तमान में दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और तनाव ने वैश्विक बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईंधन की बढ़ती कीमतें और खाद्यान्न संकट दुनिया के बड़े-बड़े देशों के लिए चुनौती बने हुए हैं। राष्ट्रपति ने इन चुनौतियों का जिक्र करते हुए गर्व व्यक्त किया कि भारत इन विपरीत परिस्थितियों में भी एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत की विकास दर इस समय वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक रहने का अनुमान है।

यह तेज विकास दर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है। डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि आज दुनिया के आधे से अधिक रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन अकेले भारत में हो रहे हैं। यह तकनीक और वित्तीय समावेशन का एक ऐसा उदाहरण है जिसने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है और आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और कड़े कूटनीतिक फैसले

राष्ट्रपति का यह संबोधन देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति सरकार के कड़े रुख को भी दर्शाता है। उन्होंने हाल ही में सीमा पार आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया के सामने भारतीय सेना की अचूक क्षमता और अदम्य साहस को साबित किया है।

इसके साथ ही, आतंकवाद को पनाह देने वाले पड़ोसी देश को कड़ा संदेश देते हुए उन्होंने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को निलंबित रखने के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने इसे देश और विशेष रूप से हमारे किसानों के हित में लिया गया एक बड़ा, साहसिक और निर्णायक कदम बताया। इस अवसर पर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले और अदम्य साहस दिखाने वाले जांबाजों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों की भी घोषणा की गई, जो सुरक्षा बलों के मनोबल को और ऊंचा उठाएगा।

न्याय की सुलभता और सामाजिक समावेश

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने देश की न्याय प्रणाली पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्याय हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और संसाधनों की कमी किसी भी व्यक्ति के लिए न्याय के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। न्यायिक बिरादरी से जुड़े हर व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी समय पर और किफायती न्याय मिल सके।

इसके अलावा, उन्होंने युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को मिल रहे अवसरों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के भारत की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि अब समाज का हर वर्ग बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा करने का हौसला रखता है।

2047: ‘विकसित भारत’ का संकल्प

भाषण के अंत में राष्ट्रपति ने देश को याद दिलाया कि हम स्वतंत्रता के अमृत काल से गुजर रहे हैं। हमारा अंतिम लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण रूप से ‘विकसित राष्ट्र’ बनाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश स्वदेशी तकनीक, ग्रीन एनर्जी (हरित परिवर्तन) और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

राष्ट्रपति का यह संबोधन देशवासियों में नए उत्साह, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना का संचार करने वाला है। यह संदेश देता है कि बाहरी परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि देश एकजुट होकर सही दिशा में आगे बढ़े, तो उसे दुनिया की महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।


यदि आप इस लेख में आर्थिक आंकड़ों की और समीक्षा जोड़ना चाहते हैं या सुरक्षा नीतियों पर और विस्तार चाहते हैं, तो कृपया बताएं।

वैश्विक चुनौतियों के बीच उभरता भारत: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ऐतिहासिक संबोधन का विस्तृत विश्लेषण

नई दिल्ली:
स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर देश के नाम अपने विशेष संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत की बढ़ती वैश्विक धमक, मजबूत आर्थिक बुनियाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कड़े फैसलों का एक व्यापक खाका प्रस्तुत किया। देश जब अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तब राष्ट्रपति का यह भाषण 140 करोड़ भारतीयों में एक नया आत्मविश्वास फूंकने वाला है। उन्होंने दुनिया भर में जारी युद्धों, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन के संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को ‘आत्मनिर्भरता की महागाथा’ करार दिया।


📈 वैश्विक मंदी और भारतीय इकोनॉमी का चमत्कार

वर्तमान समय में दुनिया के कई विकसित देश आर्थिक मंदी, बेकाबू मुद्रास्फीति और युद्ध जनित संकटों से जूझ रहे हैं। इसके विपरीत, भारत की विकास दर वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक रहने का अनुमान है।

राष्ट्रपति ने इस आर्थिक सफलता के मुख्य स्तंभों को रेखांकित किया:

  • सुलभ और सुरक्षित डिजिटल क्रांति: आज भारत दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, जहां 50% से अधिक वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन अकेले हमारे देश में हो रहे हैं। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े मॉल तक, डिजिटल भुगतान ने देश की अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाया है।
  • समावेशी कल्याणकारी योजनाएं: पिछले एक दशक में व्यापक और समावेशी नीतियों के कारण 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। इसके अलावा, सरकार की मुफ्त राशन योजना के जरिए 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

🛡️ राष्ट्रीय सुरक्षा: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और कूटनीतिक कड़ाई

राष्ट्रपति का यह संबोधन भारत की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के प्रति सरकार के दृढ़ संकल्प को दिखाता है। उन्होंने देश की सुरक्षा के संबंध में दो बेहद बड़े और कड़े संदेश दिए:

  1. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता: सीमा पार आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि भारतीय सशस्त्र बल सटीकता से हमला करने (Precision Strikes) में पूरी तरह सक्षम हैं। आतंकवाद फैलाने वालों और उनके मददगारों को दुनिया के किसी भी कोने में बख्शा नहीं जाएगा।
  2. सिंधु जल समझौते पर कड़ा रुख: आतंकवाद को संरक्षण देने वाले पड़ोसी देश के खिलाफ सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को निलंबित रखने के फैसले को उन्होंने राष्ट्रहित में एक बड़ा और साहसिक कदम बताया। यह निर्णय विशेष रूप से हमारे किसानों के अधिकारों और देश की पानी की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
  3. वीरता पुरस्कार: देश की रक्षा में अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी गई, जो सुरक्षा बलों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता को दर्शाता है।

⚖️ सामाजिक न्याय, परीक्षा सुधार और युवा शक्ति

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में देश की आंतरिक प्रणालियों को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया:

  • न्याय प्रणाली में सुधार: उन्होंने न्यायिक बिरादरी को याद दिलाया कि समाज का कोई भी नागरिक धन या संसाधनों की कमी के कारण न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। समय पर और किफायती न्याय देना हर स्तर पर हमारा पहला कर्तव्य है।
  • पारदर्शी परीक्षा प्रणाली: युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे व्यापक सुधारों का जिक्र किया। सरकारी और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं ताकि देश के युवाओं का भरोसा बना रहे।
  • आंतरिक सुरक्षा: देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली सफलताओं को उन्होंने एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि बताया।

🏛️ साझा विरासत और 2047 का विराट संकल्प

भाषण के समापन सत्र में राष्ट्रपति ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व, डॉ. बी.आर. आंबेडकर के सामाजिक सुधारों और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा 550 से अधिक रियासतों के एकीकरण का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि हाल ही में भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है, जो हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने तेलुगु लेखक गुराजाडा अप्पाराव की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा— “देश केवल मिट्टी का नाम नहीं है, देश इसके नागरिकों से बनता है।” हमारा एकमात्र संकल्प और लक्ष्य वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का निर्माण करना है। स्वदेशी तकनीक, रक्षा आत्मनिर्भरता और ग्रीन एनर्जी (हरित परिवर्तन) के बल पर भारत इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की ओर अग्रसर है।


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