₹92 Crore Spent on Union Ministers’ Bungalows in Just 1 Year!

Union Ministers के दिल्ली स्थित सरकारी बंगलों के रेनोवेशन और रखरखाव पर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च हुए हैं, जो कि एक आरटीआई (RTI) के खुलासे में सामने आया है.
यहाँ इस खबर की पूरी न्यूज़ रिपोर्ट (News Article) दी गई है, जिसे आप अपने ब्लॉग, न्यूज़ पोर्टल या सोशल मीडिया पर इस्तेमाल कर सकते हैं:
📰 RTI का बड़ा खुलासा: 1 साल मेंUnion Ministers के बंगलों के रेनोवेशन पर खर्च हुए रिकॉर्ड ₹92 करोड़
नई दिल्ली:
दिल्ली के पॉश लुटियंस बंगला जोन (Lutyens’ Bungalow Zone) में रहने वाले Union Ministers के सरकारी आवासों की मरम्मत, सजावट और रखरखाव को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इन बंगलों के रेनोवेशन और मेंटेनेंस पर रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए हैं.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) द्वारा दायर की गई इस आरटीआई रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले 11 वर्षों में मंत्रियों के घरों की मरम्मत का यह खर्च तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है. साल 2014-15 में यह खर्च ₹27.47 करोड़ था.
💰 12 सालों में ₹547 करोड़ से अधिक का खर्च
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), जो इन आधिकारिक आवासों की मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा संभालता है, उसके आंकड़ों के मुताबिक सरकार ने 2014-15 से 2025-26 के बीच मंत्रियों के इन बंगलों पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए हैं.
- 2014 से 2019: मंत्रियों के बंगलों पर सालाना औसत खर्च लगभग ₹26.78 करोड़ था.
- 2019 से 2024: यह सालाना औसत खर्च बढ़कर करीब ₹50 करोड़ हो गया.
- 2024-2025: ग्राफ और ऊपर गया और खर्च ₹71.98 करोड़ तक पहुंच गया.
- 2025-2026: अब तक का सबसे उच्चतम रिकॉर्ड बनाते हुए यह आंकड़ा ₹92.35 करोड़ पर आ गया.
👤 प्रति मंत्री औसतन ₹1.2 करोड़ का खर्च
Union Ministers परिषद में आमतौर पर 70 से 72 कैबिनेट और राज्य मंत्री होते हैं. इस हिसाब से देखें तो पिछले एक साल में प्रति मंत्री के बंगले पर औसतन ₹1.2 करोड़ का खर्च आया है. हालांकि, अलग-अलग बंगलों की स्थिति के अनुसार यह वास्तविक खर्च कम या ज्यादा हो सकता है.
🛠️ आखिर क्यों आ रहा है इतना भारी-भरकम खर्च?
जब इस बेतहाशा बढ़ते खर्च को लेकर अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने इसके पीछे कई बड़ी वजहें बताईं:
- बढ़ती महंगाई: निर्माण सामग्री और मजदूरी की लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
- 100 साल पुरानी इमारतें: लुटियंस जोन के ये बंगले ब्रिटिश काल (1912-1930) के दौरान बने थे. लगभग 80 से 100 साल पुराने होने के कारण कुछ इमारतें ढांचागत रूप से असुरक्षित होने लगी हैं.
- रोजमर्रा की समस्याएं: एक कैबिनेट मंत्री के स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बंगलों में सीलन (seepage), दीमक (termites), पुरानी वायरिंग के कारण बिजली की खराबी, प्लंबिंग और फ्लोर टाइल्स बदलने जैसे काम हर कुछ महीनों में कराने पड़ते हैं.
🚫 इन खर्चों का विवरण नहीं मिला
इस आरटीआई रिपोर्ट में सिर्फ Union Ministers और राज्य मंत्रियों के सरकारी आवासों का ही विवरण दिया गया है. सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) ने उन लोकसभा और राज्यसभा सांसदों (MPs) के घरों के खर्च का डेटा नहीं दिया है जो मंत्री पद पर नहीं हैं. साथ ही, मंत्रियों के सरकारी कार्यालयों (Offices) पर हुए खर्च की जानकारी भी इसमें शामिल नहीं है.
1. 📱 सोशल मीडिया स्टाइल (Short & Engaging – For Instagram, Facebook, X)
RTI का बड़ा धमाका: नेताओं के बंगलों पर जनता के ₹92 करोड़ स्वाहा! 💸
क्या आप जानते हैं कि हमारे मंत्रियों के आलीशान सरकारी बंगलों को चमकाने में 1 साल में कितना पैसा खर्च होता है? RTI (सूचना के अधिकार) से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है।
मुख्य बातें:
- ₹92.35 करोड़: सिर्फ एक साल (वित्त वर्ष 2025-26) में केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रेनोवेशन और मेंटेनेंस पर खर्च हुए।
- ₹1.2 करोड़ प्रति मंत्री: अगर हर मंत्री के हिसाब से हिसाब लगाया जाए, तो औसतन हर एक बंगले पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
- 3 गुना बढ़ा खर्च: साल 2014 में यह खर्च सिर्फ ₹27 करोड़ था, जो अब आसमान छू रहा है।
अधिकारियों का तर्क: अधिकारियों का कहना है कि लुटियंस दिल्ली के ये बंगले 100 साल पुराने (अंग्रेजों के जमाने के) हैं। इसलिए इनमें सीलन, दीमक और प्लंबिंग की समस्या बनी रहती है, जिसे ठीक करने में भारी बजट लगता है।
आपकी क्या राय है? क्या पुरानी इमारतों के नाम पर जनता के टैक्स का इतना पैसा खर्च होना सही है? कमेंट में बताएं! 👇
2. 🎥 यूट्यूब स्क्रिप्ट स्टाइल (Video Script – For Reels / Shorts / YouTube Videos)
(स्क्रीन पर टेक्स्ट: ₹92,000,0000 का बंगला रेनोवेशन! 😱)
[वॉयसओवर / एंकर]:
“दोस्तों, क्या आप सोच सकते हैं कि देश के मंत्रियों के सरकारी बंगलों को सिर्फ मेंटेन रखने और चमकाने के लिए 1 साल में कितना पैसा खर्च होता है? ₹5 करोड़? ₹10 करोड़? जी नहीं! एक ताजा RTI रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल में केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के रेनोवेशन पर पूरे ₹92 करोड़ से ज्यादा उड़ा दिए गए!
[वीडियो में ग्राफिक्स या मंत्रियों के बंगलों की तस्वीरें दिखाएं]:
“जी हां, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी CPWD के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में यह खर्च ₹92.35 करोड़ रहा। अगर देश के 70-72 मंत्रियों में इसे बांटें, तो हर एक मंत्री के बंगले पर औसतन 1 करोड़ 20 लाख रुपये का खर्च आया है! चौंकिए मत, पिछले 11 सालों में यह खर्च तीन गुना बढ़ चुका है। 2014 में यह आंकड़ा सिर्फ 27 करोड़ था, जो आज 92 करोड़ पार कर गया है। अधिकारियों का कहना है कि ये इमारतें अंग्रेजों के जमाने की हैं, इसलिए सीलन और मरम्मत में इतना पैसा लगता है।”
[एंकर एंडिंग नोट]:
“जनता के टैक्स के इस भारी-भरकम इस्तेमाल पर आपकी क्या राय है? क्या मंत्रियों के घरों पर इतना खर्च जायज है? कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर लिखें और ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें!”
3. 📊 इंफोग्राफिक / फैक्ट-शीट स्टाइल (Quick Bullet Points – For WhatsApp Groups / Telegram)
📌 फटाफट न्यूज़: RTI में मंत्रियों के बंगलों के खर्च का कच्चा चिट्ठा
- ताजा अपडेट: वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक बंगलों की मरम्मत और सजावट पर ₹92.35 करोड़ का रिकॉर्ड खर्च।
- 12 साल का कुल खर्च: साल 2014 से लेकर अब तक सरकार मंत्रियों के इन आलीशान घरों पर कुल ₹547.68 करोड़ फूंक चुकी है।
- सालाना खर्च का ग्राफ:
- 2014-19: औसत ₹26.78 करोड़ सालाना
- 2019-24: औसत ₹50 करोड़ सालाना
- 2024-25: ₹71.98 करोड़
- 2025-26: ₹92.35 करोड़ (अब तक का सबसे ज्यादा)
- क्या शामिल नहीं है?: इस खर्चे में सामान्य सांसदों (MPs) के घरों का खर्च और मंत्रियों के सरकारी दफ्तरों (Offices) का खर्च शामिल नहीं है। यह सिर्फ उनके रहने के बंगलों का डेटा है।
